शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

उत्तराखंड को पटरी पर लाना है, तो पलायन रोकना होगा - पहला कदम वेतन भोगियों के लिए अनिवार्य आदेश..

सेवा में,
श्रीमान सी.एम्./मंत्री/विधायक/सांसद, समष्त क्षेत्र उत्तराखंड|

महोदय, 

उत्तराखंड को पटरी पर लाना है, तो पलायन रोकना होगा, सरकार को त्वरित रूप से पहला कदम सरकारी शिक्षा को सुधारना होगा| इसके लिए सरकार त्वरित शाशनादेश जारी करेकि सरकारी ख़जाने से वेतन भत्ते लेने वाले समस्त कर्मचारी, अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि एक माह के अन्दर अपने बच्चों को अपने तैनाती स्थल या निवास स्थल के सरकारी स्कूल में पढ़ना सुनिश्चित करें| जो ऐसा न करे उसका वेतन रोक दिया जाए, तीन माह बीतने पर पदमुक्त कर नईं भर्ती की जाए | कुछ कर्मचारी अपने स्वार्थ के लिए इसका विरोध करेंगे, मगर ऐसा करने से इस प्रदेश के सवा करोड़ लोगों के लिए एक कारगर कदम होगा| एक बार जहाँ कर्मचारियों/अधिकारीयों/ जनप्रतिनिधियों के अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे, तो गुणवत्ता में सुधार आना स्वाभाविक होगा| फिर पलायन तो रुकेगा ही, छोटे-छोटे रोजगार होटल, ढाबे, किरायेदारी, राशन, शब्जी, जूते, कपड़े आदि के विक्रेता, कृषि, बागवानी, फलोत्पादन, जड़ी बूटी, डेरी, आदि कई प्रकार के रोजगार उत्पन्न होगें और सभी क्षेत्रों में चमत्कारिक प्रगति होगी| 

अत: कांग्रेस, भाजपा, यूकेडी, बसपा, निर्दलीय सभी विधायकों एवं सांसदों से आशा है कि इस दिशा में त्वरित रूप से कदम उठायेंगे और सवा करोड़ लोगों की अपेक्षा पूरी करेंगे| जनप्रतिनिधि बनने का मौका बार-बार, या हर किसी को नहीं मिलता है आपको प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है, प्रदेश की जनता की नजरों में हीरो बनने का अधिकार मिला है, इस अधिकार का प्रयोग कर इतिहास लिखें |

सधन्यवाद सहित जनहित अभिलाषी, 
भार्गव चन्दोला (हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी), 9411155139
दिनांक: 1-8-2014


सोमवार, 28 जुलाई 2014

मोलवी जी प्रकृति को बचाने के लिए करो फ़तवा जारी

क्या किसी धर्म में एसी शक्ति है जो "ग्राउंड वाटर लेवल" को ऊपर ले आये और उसे "पीने लायक" बना दे ....? गागर में जितना पानी होगा उतना ही प्रयोग कर सकते हो उसके बाद ? 
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सभी प्रकृति प्रेमियों को "ईद मुबारक" काश इस अवसर पर मस्जिद के मौलवी प्रत्येक नमाजी को एक पेड़ लगाने का फ़तवा जारी करते और खुद भी एक पेड़ लगा लेते तो सभी को प्रकृति की सुरक्षा का महत्व भी समझ आता और समाज में एक अच्छा सन्देश भी जाता....

रविवार, 27 जुलाई 2014

जनता को दंगो में धकेलकर धर्म के ठेकेदार मौज में

जो लोग शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, बिजली, पानी, दुराचार, भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंतशील मुद्दों को छोड़ मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि धार्मिक विषयों, स्थलों-भवनों के लिए लड़ रहे हैं, वो सभी निर्पट मूर्ख हैं और धर्म के ठेकेदारों के हाथों की कठपुतली बनकर अपने ही हाथों अपने देश को विनाश की ओर धकेल रहे हैं, एसा करने से न उनका खुद का भला होगा, न विपक्षी का, भला होगा तो केवल धर्म के ठेकेदारों का, सोचो जरा आज आपके गाँव में सरकारी स्कूल की जो खस्ता हालत है !क्या वही हालत आपके गाँव के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि धार्मिक स्थल या उसके संचालकों की भी है ? अगर नहीं तो सोच बदलो और आपसी सोहार्द से देश बचाओ...

सवा करोड़ मुर्दों को स्वयं जागना होगा

इतिहास गवाह है उत्तराखंड में नेता हो, ब्यूरोक्रेट्स हो या कोई आम कर्मचारी सबसे ज्यादा विवादित, भ्रष्ट, रिश्वतखोर, चरित्रहीन को इस प्रदेश में सबसे ऊँचे और मलाई दार जगह (यानि जहाँ सबसे अधिक रिश्वत मिले) से नवाजा गया है | फिर भी सवा करोड़ जनता मूकदर्शक बनी हुई है, कुछ एक हम जैसे पागल बढ़-बढ़ाते रहते हैं, मगर उससे कुछ नहीं हो सकता, सवा करोड़ मुर्दों को स्वयं जागना होगा, तभी इस प्रदेश को पटरी पर लाया जा सकता है, नहीं तो कुछ हज़ार लोग दीमक की तरह इस प्रदेश को चट कर जायेंगे और जब डकार लेंगे तब तक बहुत देर हो चुकी होगी |

सोमवार, 21 जुलाई 2014

सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में त्वरित सुधार का एकमात्र विकल्प


राज्य सरकार या केंद्र सरकार सरकारी शिक्षा में अगर सच में सुधार करना चाहती है तो सभी सरकारी लोकसेवकों, अधिकारीयों, कर्मचारियों एवं मानदेय लेनेवाले जनप्रतिनिधियों को उनके नौनिहालों को अपने तैनाती स्थल के नजदीकी सरकारी स्कूल में पढ़ाना अनिवार्य करे, मैं दावे से कह सकता हूँ एक महीने के भीतर सरकारी शिक्षा में सुधार के परिणाम देखने को मिलेंगे इतना ही नहीं एसा करने से पहाड़ों से एवं देहातों से शहरों की तरफ हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी | 

वर्ना शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी, मुख्यमंत्री हरीश रावत, मानव संसाधन मंत्री #Smriti Zubin Irani, पी.एम्. #Narendra Modi ji चाहे जितना जोर लगा लें, चाहे जितनी योजनायें लागू कर लें, सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधर सकती है, इतना ही नहीं मध्याहन भोजन की गुणवत्ता भी तभी सुधर सकती है जब उसी भोजन को सरकारी कर्मचारी, लोकसेवक भी खाएं नहीं तो कीड़े मकोड़े मिलने की ख़बरें तो आये दिन मिलती रहेंगी |

केवल उत्तराखंड राज्य की बात करें तो उत्तराखंड में जनता के करों से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को हर साल 50 अरब रूपये वेतन के रूप में प्रतिवर्ष दिया जा रहा है, मगर नौनिहालों को फिर भी गुणकारी एवं उपयोगी शिक्षा नहीं मिल पा रही है, सरकारी स्कूली शिक्षा लगभग मृत होने के कारण अभिभावक अपने नौनिहालों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं, निजी स्कूलों द्वारा पग-पग पर छात्रों एवं अभिभावकों का मानसिक,शारीरिक एवं आर्थिक उत्पीड़न किया जाता है | सरकार की रमसा, सर्वशिक्षा, मध्याहन भोजन, पी.पी.पी. माडल आदि सभी योजनायें मात्र ठेकेदारी प्रथा को जन्म देकर कुछ लोगों की जेबें गर्म करने का साधन मात्र बन रही हैं | अगर त्वरित रूप से राज्य सरकार ने सरकारी शिक्षा में सुधार करते हुए सभी सरकारी लोकसेवकों, अधिकारीयों, कर्मचारियों एवं मानदेय लेनेवाले जनप्रतिनिधियों को उनके नौनिहालों को अपने तैनाती स्थल के नजदीकी सरकारी स्कूल में पढ़ाना अनिवार्य नहीं किया तो आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं| 

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

बिटिया के जन्मदिन के अवसर पर हर साल की तरह आज भी बिटिया से करवाया वृक्षारोपण

आज मेरी बेटी सुदीक्षा 10 वर्ष पुरे कर 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, 17 जुलाई 2004 को मेरे घर में एक नन्हीं परी ने जन्म लिया देखते देखते कब 10 वर्ष बीत गए कुछ पता भी न चला, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बिटिया ने फलदार वृक्ष लगाकर जन्मदिन को याद किया, चार साल पहले 2010 में हमने पहली बार संकल्प लिया था कि हर वर्ष बिटिया के जन्मदिन के अवसर पर अन्य किसी आयोजन के बजाये वृक्षारोपण करेंगे तब से निरंतर ये शिलशिला चला आ रहा है, आज वृक्षारोपण और पूर्व में लगाये गए कुछ वृक्षों जो कि अब बिटिया की तरह ही बढ़ रहे हैं के फोटोग्राफ आपके साथ इस आशा के साथ साझा कर रहा हूँ, ताकि समाज के ज्यादा से ज्यादा लोग अपने बच्चों का जन्मदिन फलदार वृक्ष लगाकर करें जिससे प्रकृति और पर्यावरण सुरक्षित रहे और हम इन्सानों के साथ-साथ पशु-पक्षिओं को भी शुद्ध हवा, भोजन, पानी भरपूर मात्रा में मिल सके|
सधन्यवाद सहित आपका,
भार्गव चन्दोला (हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)

  




































बुधवार, 4 जून 2014

सरकारी पद पर बैठा कर रहा नमक हरामी ?

दोस्तों हम अपनी हर समस्या के लिए केवल पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हैं जबकि हक़ीकत ये कि हमारे दिए करों से पुलिस ही नहीं कई और विभागों के कर्मचारी अपना परिवार पालते हैं और बदले में समाज में अव्यवस्था के सिवा कुछ नहीं देते हैं, कुछ के नाम यहाँ आप पढ़ सकते हैं... 
शहर/गाँव में यातायात उलंघन, ट्रैफिक इंस्पेक्टर जिम्मेदार
शहर/गाँव में अवैध शराब का कारोबार, आबकारी इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में श्रमिक का उत्पीड़न, श्रम इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में नशीले पदार्थों का व्यापार ड्रग इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में सेल्स टैक्स चोरी, सेल्स इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में इनकम टैक्स चोरी, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में मारपीट,गुंडागर्दी,चेन स्नेचिंग,बलात्कार,ह्यूमन ट्रैफिकिंग,देह व्यापार पुलिस इंस्पेक्टर जिम्मेदार
शहर/गाँव में अवैध कब्जे/निर्माण, राजस्व इंस्पेक्टर जिम्मेदार,
शहर/गाँव में सड़क/नाली की समस्या, निर्माण विभाग का जे.ई. जिम्मेदार,
शहर/गाँव में पाइपलाइन/पानी की समस्या, जल संस्थान का जे.ई.जिम्मेदार,
शहर/गाँव में बिजली की समस्या, बिजली विभाग का जे.ई. जिम्मेदार,
शहर/गाँव में कूड़े की समस्या, नगर निगम/नगर पंचायत जिम्मेदार,
शहर/गाँव में पर्यावरण की समस्या, वन विभाग, पर्यावरण विभाग जिम्मेदार,
शहर/गाँव में शिक्षा की समस्या, शिक्षा विभाग जिम्मेदार,
शहर/गाँव में चिकित्सा की समस्या, चिकित्सा विभाग जिम्मेदार,
शहर/गाँव में रिश्वतखोरी की समस्या, विजिलेंस विभाग जिम्मेदार,
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अगर आपके आस-पास ऐसे लोग रह रहे हैं जो हमारा नमक खा नमक हरामी कर रहे हैं ? तो उनको उनके कर्तब्यों का अहसास करवाएं समाज में तभी परिवर्तन सम्भव है जब हर कोई अपना कर्तब्य ईमानदारी से निभाए |
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जनहित में जारी,
आपका भार्गव चन्दोला