बुधवार, 3 दिसंबर 2014

महाराणा प्रताप के नाम पर कालिख पोत रहा स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर, देहरादून

सेवा में,                                               दिनांक:  3-12-14
     श्रीमान लोकायुक्त महोदय/
     एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री हरीश रावत जी
     उत्तराखंड सरकार |

विषय: महाराणा प्रताप के नाम पर कालिख पोत रहा स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर देहरादून| नियमों को तार-तार कर शिक्षा विभाग की प्राइमरी सहायक शिक्षिका श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में प्रवक्ता के पद पर किया गया समायोजन| खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, खेल सचिव एवं अध्यक्ष स्पोर्ट्स कालेज मैनेजमेंट बोर्ड डा. अजय प्रद्योत, उपनिदेशक खेल श्री अजय कुमार अग्रवाल, स्पोर्ट्स कालेज प्राचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी पद्मेंद्र सकलानी द्वारा खेला गया श्रीमती मीना सिंह को समायोजन करने का खेल| खेल एवं युवा कल्याण विभाग में तैनात उपनिदेशक श्री शक्ति सिंह की पत्नी हैं श्रीमती मीना सिंह |
महोदय,
     तकनीकी क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन करता रुड़की आई.आई.टी., सैन्य क्षेत्र में आई.एम्.ए., कृषि क्षेत्र में पंतनगर विश्वविध्यालय की तरफ जब नजर जाती है तो फक्र से सीना चौड़ा हो जाता है की ये तीनों उत्तराखंड के अंग हैं| ठीक इसी प्रकार खेल जगत में प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की स्थापना की गई थी और कालेज प्रबंधन को प्रदेश से उत्तम छात्रों का चयन कर प्रशिक्षित करने का जिम्मा दिया गया था ताकि प्रदेश के नौनिहाल राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर खेल जगत में प्रदेश का नाम रोशन कर सकें मगर स्पोर्ट्स कालेज प्रबंधन कालेज की स्थापना के उद्देश्य को पूरा करने में पूर्ण रूप से विफल रहा है, कारण जानने के लिए मैंने सूचना का अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 के अंतर्गत स्पोर्ट्स कालेज से कुछ बिन्दुओं पर सूचना मांगी तो आनाकानी के बाद जो सूचना प्राप्त हुई उससे चौंकाने वाले तथ्य सामने आये जिन्हें देखकर हैरानी होती है, स्थापना से लेकर अब तक महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के साथ कालेज प्रबंधन, खेल विभाग, खेल मंत्री, खेल सचिव एवं उपनिदेशक खेल केवल अपने हितों को साधने का खेल खेलते नजर आ रहे हैं|
     ताजा मामला अभी-अभी शिक्षा विभाग में प्राइमरी स्कूल में प्राइमरी सहायक अध्यापिका श्रीमती मीना सिंह को सारे नियम कानूनों को दरकिनार करके महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज रायपुर, देहरादून में प्रवक्ता के पद पर समायोजन करने का है|
     श्रीमती मीना सिंह जिनकी नियुक्ति से लेकर अब तक की सारी सेवा देहरादून और आस-पास के सुगम क्षेत्र में रही है, शिक्षक स्थानान्तरण नीति बनने के बाद श्रीमती मीना सिंह को दुर्गम स्थान पर स्थानान्तरण पर जाना था मगर उससे पहले ही श्रीमती मीना सिंह के पति श्री शक्ति सिंह, उपनिदेशक खेल एवं युवा कल्याण ने जिला शिक्षा अधिकारी देहरादून श्री पद्मेंद्र सकलानी से 6 दिसंबर 2013 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवा दिया और अपने विभागीय अधिकारीयों एवं अपने पद का दुरुपयोग करके सारे नियमों को ताक पर रखकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नथनपुर, देहरादून में प्राइमरी सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात अपनी पत्नी श्रीमती मीना सिंह को सीधे महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में बिना किसी रिक्ति के आवेदन की विज्ञप्ति के सीधे सहायक अध्यापिका माध्यमिक के पद पर 10 दिसंबर, 2013 की बोर्ड बैठक में प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव पारित करवा दिया और अध्यक्ष मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी एवं सचिव, युवा कल्याण एवं खेलकूद, उत्तराखंड शासन के पद पर बैठे खुद प्रतिनियुक्ति पर आये डा. अजय प्रद्योत ने 14 दिसंबर शनिवार के दिन श्रीमती मीना सिंह को सीधे पांच वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति आदेश जारी कर दिया, कब यह आदेश जारी हुवा और कब श्रीमती मीना सिंह तक पहुंचा अगले दिन रविवार यानि 15 दिसंबर का अवकाश होने के बावजूद 16 दिसंबर, 2013 को मीना सिंह ने स्पोर्ट्स कालेज में प्रतिनियुक्ति पर अपनी जोइनिंग देकर उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी कर दिए इस सबसे सारा खेल समझा जा सकता है, वैसे तो सरकारी डाकें महीनों महीने नहीं आती हैं ये पहली बार हुवा होगा कि मीना सिंह के लिए डाकखाने रविवार को भी खुले रहे होंगे?
     श्रीमती मीना सिंह ने स्पोर्ट्स कालेज में प्रतिनियुक्ति पर अपनी 10 दिन की सेवा दी और उसके बाद स्पोर्ट्स कालेज से 1 जनवरी 2014 से 20 मई, 2014 तक के लिए बी.एड.शैक्षिक अवकाश ले लिया और इसे स्पोर्ट्स कालेज ने स्वीकृत भी कर दिया और स्पोर्ट्स कालेज श्रीमती मीना सिंह को सरकारी खजाने से प्रतिनियुक्ति भत्ते के साथ शैक्षिक अवकाश का वेतन भी जारी करता रहा अगर इसी प्रकार प्रदेश के सभी कर्मचारी वेतन के साथ शैक्षिक अवकाश पर जाते रहे तो प्रदेश की जनता का खजाना तो बिना बात के ही लुटता रहेगा| जबकि स्पोर्ट्स कालेज नियमावली, वर्ष 2013 में सहायक शिक्षा अध्यापक के पद पर प्राइमरी सहायक शिक्षा अध्यापक को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकता हो ऐसा कोई उल्लेख ही नहीं है|
     इधर श्रीमती मीना सिंह के शैक्षिक अवकाश पर गए एक माह भी पूरा नहीं हुवा उधर खेल मंत्रालय ने भी खेल एवं युवा कल्याण उपनिदेशक श्री शक्ति सिंह की पत्नी श्रीमती मीना सिंह के लिए और उदारता दिखाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री दिनेश अग्रवाल ने श्रीमती मीना सिंह को स्पोर्ट्स कालेज में समायोजन के लिए सचिव खेल/अध्यक्ष, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स सोसाइटी रायपुर, देहरादून को पत्रावली प्रस्तुत करने का लिखित आदेश जारी कर दिया उपनिदेशक, युवा कल्याण की पत्नी का सवाल जो था खेल मंत्री कैसे नहीं दरियादिली दिखाते?
     इधर श्रीमती मीना सिंह का शैक्षिक अवकाश पूरा होता उससे पहले ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के प्रधानाचार्य श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी श्रीमती मीना सिंह के लिए उदारता दिखाई और उनके शैक्षिक अवकाश के दौरान ही निदेशक खेल को श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में आमेलन के लिए पत्र लिख कर अनापत्ति जाहिर कर दी और मीना सिंह को बिना परीक्षा पास किये सफल घोषित कर दिया |
     श्रीमती मीना सिंह ने 20-9-14 को प्रधानाचार्य, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज को अपने बी.एड. कोर्स का अंकपत्र की छायाप्रति सेवा पुस्तिका में अंकित करने के लिए पत्र लिखा|
     श्रीमती मीना सिंह ने 22-9-14 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी को अपना समायोजन प्रवक्ता (इतिहास) के पद पर करने के लिए पत्र लिखा|
     30-9-14 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत ने सचिव, खेल उत्तराखंड शासन यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत को श्रीमती मीना सिंह, प्राइमरी सहायक अध्यापिका, शिक्षा विभाग के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में सेवा स्थानान्तरण के आधार पर आमेलन किये जाने के सम्बन्ध में पत्र जारी किया जिसके जवाब में सचिव, खेल उत्तराखंड शासन यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत खुद ही खुद को श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में प्रवक्ता के पद पर समायोजन करने की स्वीकृति प्रदान करते हैं |
     उपनिदेशक, युवा कल्याण एवं खेलकूद श्री शक्ति सिंह की पत्नी श्रीमती मीना सिंह को प्रवक्ता (इतिहास) के पद पर समायोजन करने का 9 अक्टूबर, 2014 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत द्वारा आदेश जारी किया गया है, जबकि स्पोर्ट्स कालेज सेवा नियमावली वर्ष 2013 के भाग तीन पृष्ठ संख्या 4 में स्पष्ट उल्लेखित है कि प्रवक्ता के स्वीकृत पदों में 50% सीधी भर्ती द्वारा एवं 50% पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा जिसमें प्रवक्ता के पद पर पदोन्नति के लिए सहायक शिक्षा अध्यापक के पद में मौलिक रूप से नियुक्त शिक्षकों, जिन्होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को इस रूप में न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो और जो नियम 8(3) के अधीन पद के लिए विहित अपेक्षित अहर्ता रखता हो, में से पदोन्नति द्वारा भरा जाएगा, यहाँ ये भी स्पष्ट किया जाता है कि महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में वर्तमान में इतिहास विषय पढ़ाया ही नहीं जा रहा है और माध्यमिक शिक्षा परिषद (उत्तराखंड बोर्ड) से इतिहास विषय को पढ़ाया जाने की कोई मान्यता भी नहीं ली गयी है जो कि प्रवक्ता (इतिहास) पर श्रीमती मीना सिंह की नियुक्ति को और भी संदिग्ध बनाता है|
     जबकि श्रीमती मीना सिंह द्वारा सहायक अध्यापक के पद पर स्पोर्ट्स कालेज में मात्र 10 दिन ही सेवा दी गई है, इससे पूर्व में मीना सिंह प्राइमरी सहायक अध्यापिका रही हैं न की माध्यमिक सहायक अध्यापिका इससे स्पष्ट है कि मीना सिंह की नियुक्ति के लिए किस प्रकार से खेल खेला गया है| जिस प्रकार एक प्राइमरी सहायक शिक्षिका को प्राइमरी सहायिका से प्रवक्ता के पद तक का खेल रचा गया वो प्रदेश के उन प्रतिभावान युवाओं के अधिकारों पर कुठाराघात है जो दिन रात इस आशा के साथ लगन मेहनत करते हैं कि एक दिन उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलेगा|
            इसके आलावा श्रीमती मीना सिंह जहाँ जहाँ पर भी तैनात रही हैं उनके पति श्री शक्ति सिंह, उपनिदेशक, खेल एवं युवा कल्याण द्वारा विभागीय गाड़ी को विभागीय कार्यों के बजाय अपनी पत्नी श्रीमती मीना सिंह को लाने ले जाने के कार्य में दुरूपयोग किया जाता रहा है जिसका शाक्षी जिस क्षेत्र में श्रीमती मीना सिंह तैनात रही हैं वहां की जनता और मैं स्वयं हूँ, महोदय ऐसे कृत्य से प्रदेश की जनता के राजस्व पर डाका डाला गया है |
     महोदय अगर इसी प्रकार प्रदेश में जंगलराज कायम रहेगा और कर्मचारी अधिकारी अपने परिवार के सदस्यों के लिए सारे नियम कानूनों को धत्ता बताते रहेंगे तो प्रदेश के बेरोजगार कहाँ जायेंगे ? महोदय इस प्रकार के कृत्यों से प्रतिभावान युवाओं का मनोबल टूटता है और वो अवसादग्रस्त होकर अपराध जगत की ओर जाने को मजबूर होते हैं इसलिए ऐसे विषयों पर दोषियों पर कढ़ी से कढ़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए|
     अत: महोदय आप से आग्रह है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग एवं महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की स्थापना से लेकर अब तक हुई नियुक्ति, तमाम खरीद फ़रोख्त, सांस्कृतिक आयोजन, खेल आयोजन, स्किल डेवलपमेंट, पायका के तहत बनाये गए खेल मैदान, एवं निर्माण कार्यों की सी.बी.आई. जांच करवाई जाए एवं जो भी दोषी हों जितने भी शक्तिशाली हों उन सभी पर कढ़ी से कढ़ी कार्यवाही की जाए, साथ ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज को उसके नाम के अनुरूप आई.आई.टी. रुड़की, आई.एम्.ए. एवं पंतनगर विश्वविद्यालय की तरह प्रतिष्ठित बनाया जाए ताकि खेल जगत में प्रदेश के नौनिहाल उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें|

धन्यवाद,

भार्गव चन्दोला (सामाजिक कार्यकर्त्ता)
पूर्व प्रदेश सचिव आप उत्तराखंड
1 राजराजेश्वरी विहार, वार्ड न. 14, नथनपुर, पो.ओ.नेह्रुग्राम-248005, 
देहरादून, उत्तराखंड

संपर्क न. 09411155139, email: bhargavachandola@gmail.com

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को उनके जन्मदिन के अवसर पर चाइना ने दिया तौफा

बब्बर शेर भारत के प्रधानमंत्री माननीय Narendra Modi जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई, साहेब अख़बारों में पढ़ रहा हूँ चाइना की सेना के 300 जवानों ने 100 भारतीय सैनिकों को बंधक बना लिया है, साथ लद्दाख के देमचोक इलाके में चाइना की आम जनता ने घर बनाने शुरू कर दिए हैं और भारत द्वारा निर्माणाधीन नहर तक का काम रुकवा दिया है, साहेब ये भारत की जनता को आपके जन्मदिन के अवसर पर कैसा तौफा दे रहा है ? साहेब आपने कहा था "न किसी को आँख दिखायेंगे, न किसी को आँख दिखाने देंगे", साहेब ये चाइना वाले तो छाति में आकर बैठ गए, साहेब जल्दी  कुछ करो नहीं तो "अच्छे दिनों" पर चाइना कब्ज़ा कर लेगा....

गुरुवार, 11 सितंबर 2014

"जम्मू-कश्मीर में प्रकृति के तांडव के बाद जनहित में एक गम्भीर सूचना"

मित्रों जम्मू-कश्मीर में भयानक आपदा आई है जिससे वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, ऐसे में वो चील-कौवे भी मंडराने लगे हैं जो ऐसे अवसर पर पीड़ितों की मदद करने के नाम पर भांति-भांति की दुकाने खोलकर बैठ जाते हैं, जिनका केवल एक ही मकसद होता है आपदा के नाम पर अपने लिए सम्पदा जोड़ना |
16-17 जून वर्ष 2013 में उत्तराखंड में भी भयानक तांडव प्रकृति ने दिखाया था जिसमे अलग-अलग तरीके से लूट-खसोट आज भी बदस्तूर जारी है| इस क्रम में सबसे ऊपर ईमानदार पार्टी होने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी है जिसने आपदा पीड़ितों के नाम पर चंदा एकत्र करके विश्वभर के दानदाताओं की भावनाओं के साथ कुठाराघात किया है, सबूतों के साथ पूर्ण सच्चाई जानने के लिए आप निम्न लिंक पर जाकर देख सकते हैं:
http://bhargava-chandola.blogspot.in/2014/08/16-17-2013.html
मित्रों इसलिए मेरा आप सभी से निवेदन है आप आपदा पीड़ितों की सहायता करें, मगर या तो सरकारी ख़जाने में जमा करके जिसका आप सूचना के अधिकार के माध्यम से कल के दिन पर हिसाब भी मांग सकते हैं या स्वयं पीड़ितों के पास जाकर उनकी मदद करें |
स्नेहपूर्ण जनहित अभिलाशी,
भार्गव चन्दोला (हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)
पूर्व प्रदेश सचिव, आम आदमी पार्टी उत्तराखंड

हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण की अनदेखी से होगा प्राकृतिक तांडव

कश्मीर में आपदा, उत्तराखंड में आपदा, हिमाचल में आपदा, पाकिस्तान में आपदा, चाइना में आपदा, बांग्लादेश में आपदा.... क्या अब भी महान देशभक्तों को किसी वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है ? अब तो मूर्खों को भी ये समझ आ गया होगा कि इतनी आपदायें हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक मानव दखल, कंक्रीट के जंगल, विस्फोटक, बड़ी जल विधुत परियोजनाएं और उनका मलबा यहाँ की पारिस्थितिकी के लिए अत्यधिक नुकशानदायक है, हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण की अनदेखी करना हर वर्ष कहीं न कहीं तांडव करता रहेगा..

शनिवार, 6 सितंबर 2014

"जल-जीवन बचाने के लिए बचाना होगा हिमालय" - हिमालय दिवस 9 सितम्बर

हम हर वर्ष 9 सितम्बर को हिमालय दिवस के रूप में मनाते हैं, हिमालय मतलब भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चाइना आदि देशों का जीवनदाता, अगर हिमालय न होता तो इस छेत्र का भी कोई अस्तित्व न होता और जिस दिन हिमालय नहीं होगा उस दिन इन देशों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा और ये देश पानी के आभाव के कारण रेत के टीले में तब्दील हो जायेंगे | इसलिए हमें हिमालय को समझना होगा और समझना होगा हिमालय का हमारे जीवन में क्या महत्व है? हिमालय के ग्लेशियरों से ही नदियों का अस्तित्व है जो इन ग्लेशियरों से निकलकर प्राकृतिक संतुलन बनाने का काम करती हैं, इनसे ही पीने, कृषि और पेड़-पौधों को जल की आपूर्ति होती है और वही पेड़-पौधे हमें आक्सीजन देते हैं अगर ये क्रम टूट गया तो हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा| आज हिमालय पर लगातार ख़तरा मंडरा रहा है, मनुष्य विकास की अंधी दौड़ में हिमालय की संवेदनशीलता की अनदेखी कर रहा है|
      पहाड़ों पर अत्यधिक मानव दखल के कारण आज हिमालय का अस्तित्व मिटने के कगार पर है जिसका वीभत्स नजारा वर्ष 2013 के जून माह की 16-17 तारीख को केदारनाथ, लामबगड़, धारचूला, उत्तरकाशी, गोविन्दघाट आदि क्षेत्रों में देखनो को मिला और पिछले कुछ सालों से चीन, नेपाल, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि देशों में हर साल हिमालय में हो रहे परिवर्तन के कारण भयानक आपदा आ रही हैं| हिमालय को सुरक्षित रखने के लिए सभी देशों को कारगर कदम उठाने पड़ेंगे, सीमांत जनपदों में विस्फोटकों का स्तमाल पूर्ण रूप से रोकना होगा, धार्मिक एवं पर्यटन यात्रा सीमित एवं प्राकृतिक संतुलित करनी होगी, प्राकृतिक संतुलन वाला विकास ही हिमालय को बचाने में कारगर हो सकता है|
      इतना ही नहीं आम देशवाशियों को अपने पारिवारिक उत्सवों पर पर्यावरण एवं हिमालय को सुरक्षित रखने वाले कदम उठाने होंगे, देशवाशियों को शादी-विवाह, जन्मदिन, तीज-त्यौहार आदि में अपने परिवार के साथ अपने आस-पास के क्षेत्रों में कम से कम 5 और अधिकतम अपनी छमता अनुसार फलदार वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करने का संकल्प करना होगा, इससे एक ओर जहाँ प्राकृतिक पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा वहीँ दूसरी तरफ उनके ऐसा करने से भूखे मनुष्यों एवं पशु-पक्षियों के लिए भोजन की प्राप्ति होगी, साथ ही देशवाशी अपने और अपने परिवार की इस प्रकृति के प्रति नैतिक जिम्मेदारी भी पूरी करेंगे| इतना ही नहीं एसा करने से देशवाशियों के अन्दर अच्छे संस्कार आयेंगे, और वो एक दुसरे से स्नेह करेंगे व एक दुसरे के प्रति जिम्मेदारी महसूस करेंगे| इस प्रकार शादी, जन्मदिन, तीज-त्यौहार मनानें से देशवाशियों के परिवारों की ख़ुशी कई गुना बढ़ेगी और उन्हें आत्मिक शान्ति का एहसास होगा | जब इसी प्रकार सभी देशवाशी अपने परिवार के सदस्यों के साथ हर वर्ष उत्सव मनायेंगे तो कुछ ही सालों में उनके आस-पास और उनके जीवन में एक बढ़ा बदलाव उन्हें अपनी आँखों से देखने को मिलेगा, हिमालय को बचाने के लिए इससे ज्यादा प्रभावशाली कदम दूसरा नहीं हो सकता है|
      सरकारों को पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों में कंक्रीट के जंगल सीमित करने होंगे आवासीय कालोनियों में पेड़-पौधे ज्यादा से ज्यादा हों इसके लिए कठिन नियम बनाने होंगे| प्रत्येक भवन स्वामी के लिए उसके भूखंड पर कम से कम 20% भूमि बागवानी, गार्डन और पेड़-पौधों के लिए छोड़ना अनिवार्य करना होगा| 
      देश की सरकारों को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, पर्यावरण दिवस, पृथ्वी दिवस, शिक्षक दिवस आदि दिनों में देशभर में फलदार पेड़ों का वृक्षारोपण, सफाई अभियान चलाकर इन दिवसों का सकारात्मक प्रयोग करना होगा, ताकि इन दिवसों पर वृहद् स्तर पर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कारगर कदम उठाये जा सकें |
      हिमालयी क्षेत्र में अगर केवल उत्तराखंड की बात करें तो पहाड़ों में गहरी जड़ों वाले पौधों को बढ़ावा देना होगा, फलदार एवं चौड़ी पत्ती के पौधों को बढ़ावा देना होगा, जिससे वो मिट्टी को भू-स्खलन होने से बचा के रख सकें| आज चीड़ का पेढ़ सम्पूर्ण उत्तराखंड के न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि हर साल भभकते जंगलों, मानव, पशु-पक्षी, कीट-पतंगे, पेड़-पौधों आदि अन्य जातियों की हत्या का दोषी भी है, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्यसचिव, वन-प्रमुख, वन-सचिव को बार-बार इससे हो रहे खतरे से लगातार अवगत करवाने के लिए सुझाव भेजे, मगर उनका जो जवाब था मुझे हास्यास्पद लगा उनका कहना है चीड़ से लिसा और इमारती लकड़ी मिलती है जिससे हर वर्ष 54 करोड़ का राजस्व लाभ होता है, जबकि यहाँ बता दूँ हर वर्ष इसी चीड़ की आग की आड़ में 16 करोड़ रूपये तो आग बुझाने के मद में खर्च किये जाते हैं और जो पेड़ केवल कागजों में लगाये जाते हैं, उनकी कभी पोल न खुल जाए इसलिए उनको भी इसी चीड़ के पत्तों की आग में दफ़न कर दिया जाता है| चीड़ का पेड़ भी अनोखा है एक तो चीड़ का फल पेड़ में ही पक जाता है, दूसरा उसके बीज हवा के बहाव के साथ ही दूर-दराज तक अपने-आप पहुँच जाते हैं, चूँकि इसको पानी की कम आवश्यकता पढ़ती है इसलिए ये हर जगह पनप जाता है, मगर जड़ें कमजोर होने के कारण ये कभी भी धराशाई हो जाता है जिस कारण भू-स्खलन अत्यधिक बढ़ जाता है| चीड़ जिस तेजी से कृषि भूमि, बांज के जंगलों, देवदार के जंगलों में पनप रहा है, उससे पहाड़ों की कृषि, बागवानी, बांज-बुरांश, देवदार, फलदार पेड़ एवं चारा पत्ती आदि के लुप्त होने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है, त्वरित रूप से चीड़ के पेड़ों को रोक कर पहाड़ों में कृषि, बागवानी, बांज-बुरांश, देवदार, फलदार पेड़ एवं चारा पत्ती को युद्ध स्तर पर बढ़ावा नहीं दिया गया तो परिणाम भयावह होंगे |
       
स्नेहपूर्ण जनहित अभिलाशी,
भार्गव चन्दोला (हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)
सामाजिक, आर.टी.आई. एवं राजनीतिक कार्यकर्त्ता,
1, राजराजेश्वरी विहार, नथनपुर, देहरादून, संपर्क न. 9411155139 
email: bhargavachandola@gmail.com Blog: bhargavachandola.blogspot.com

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

आम आदमी पार्टी की निर्लजता की मिशाल - चंदा जुटाऊ - चंदा खाऊ पार्टी के लुटेरों से सावधान

आम आदमी पार्टी की बेमानों की मण्डली ने मेरे द्वारा 23 August, 2014 ko किये गए खुलासे के बाद पिछले वर्ष 16-17 जून, वर्ष 2013 में विश्वभर के दानदाताओं से उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के नाम पर एकत्र किये गए आनलाइन 15 लाख और नगद लाखों रूपये चंदे में से मात्र 2,63,000/- (दो लाख त्रेसठ हज़ार रूपये) का हिसाब सार्वजानिक किया है |
दोस्तों जब डेढ़ साल पहले चंदा इतना ज्यादा आया था तो बाकि पैसे पर क्यों कुंडली मारी गई ?
उपरोक्त हिसाब भी जब मैंने सार्वजानिक रूप से खुलाशा किया तब जाकर सार्वजानिक किया गया और उपरोक्त पैसे को देने से पहले आपदा समिति की कोई बैठक नहीं की गई क्या आम आदमी पार्टी आपदा समिति अध्यक्ष ने मन मर्जी से पैसा बांटकर अपराध नहीं किया है ? क्या आम आदमी पार्टी आपदा समिति की निजी कंपनी है ?
आपदा समिति अध्यक्ष ने डेढ़ वर्ष में क्यों नहीं आपदा समिति की बैठक बुलाई ?
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक, राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ने क्यों केंद्र में आपदा पीड़ितों के लिए एकत्र की गई राशि पर कुंडली मार रखी है| क्या ये राष्ट्रीय अपराध उन्होंने जानबूझकर आपदा राशि डकारने के उद्देश्य से नहीं किया है ?
आपदा राशि बाँटने से पहले या ठिकाने लगाने से पहले प्रदेश संयोजक से भी सहमती नहीं ली गई जिन लोगों को आपदा समिति अध्यक्ष ने बिना बैठक बुलाये मन मर्जी से 2 लाख 63 हज़ार रूपये बांटे वो निम्न रूप से हैं:-
1. श्री जे पी बढ़ोनी जी (जिला संयोजक हरिद्वार जिला) 9837342284 को 50,000/- (पचास हजार रुपये मात्र)
2. श्री राकेश सिंह नेगी (जिला संयोजक पौड़ी जिला) 9412029939 को 30,000/- (तीस हजार रुपये मात्र)
3. श्री टिका प्रशाद उनियाल जी (सदस्य प्रदेश कायकारिणी) 9760694482 को 10,000/- (दस हजार रुपये मात्र)
4. श्री हरेन्द्र बिष्ट जी (सदय प्रदेश कार्यकारिणी) 9634346264 को 33,000/- (तैंतीस हजार रुपये मात्र)
5. दीपक सिंह बिष्ट जी (सदस्य उत्तरकाशी जिला) 8126340444 को 25,000/- (पच्चीस हजार रुपये मात्र)
6. श्री आदर्श बाजपेई (तत्कालीन प्रभारी आपदा प्रबंधन एवं राहत सामग्री केंद्र ऋषिकेश) 07275555755 को (20,000/- श्री टिका प्रशाद उनियाल जी के हाथों भिजवाए), + (20,000/- सरदार श्री निर्मल सिंह जुनेजा जी तत्कालीन नगर संयोजक के खाते में ट्रान्सफर करके भिजवाए), + तथा ( 40,000/- मैं खुद उन्हें ऋषिकेश में देकर आया)। इस प्रकार कुल रुपये 80,000/- (अस्सी हजार मात्र)
7. श्री प्रदीप सिंह बुटोला (जिला संयोजक रुद्रप्रयाग जिला) 7351337871 को 15,000/- (पंद्रह हजार रुपये मात्र)
8. श्री गोविन्द सिंह बिष्ट (जिला संयोजक पिथौरागढ़ जिला।) 9456513521 को 20,000/- (बीस हजार रुपये मात्र)

मैंने पूरी टीम के साथ एक दिन घंटाघर के आस-पास आपदा चंदा एकत्र किया था जिसमें 25,490/- रूपये प्राप्त हुए थे, उसी दिन शाम को रिछ्पना पुल के पास 7225/- रूपये एकत्र हुए और सारे पैसे उसी दिन आपदा प्रबंधन समिति अध्यक्ष रनवीर चौधरी के पास जमा करवा दिए थे, इसके अलावा किसी के पास मेरे द्वारा आपदा फण्ड के लिए चंदा एकत्र करने का कोई सबूत हो तो वो तुरंत मेरे खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करवाए....

आपदा समिति अध्यक्ष के पास कुल कितना नगद आपदा पीड़ितों के नाम पर एकत्र हुवा उसका हिसाब भी आम आदमी पार्टी के आपदा समिति अध्यक्ष द्वारा नहीं दिया गया, स्पष्ट है गोलमाल बड़ा किया गया है|
मजे की बात ये है जिनका मैंने आम आदमी पार्टी में रहते हुए ये मानकर स्वागत किया कि वो प्रदेश के संघर्षशील और बुद्धिजीवी लोग हैं, पार्टी से जुड़ने के बाद वो बेमान और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ खड़े होंगे और माँ-बाप की तरह हमारे मार्गदर्शक बनेंगे वो सब भी आपदा घोटाले पर मौन साधे हुए हैं और आपदा घोटालेबाजों के साथ खड़े हैं, आपदा घोटाला पर मौन उन सभी तथाकथित बुद्धिजीवियों की महत्वाकांक्षा और पद लोलुपता को भी स्पष्ट दर्शाता है| उनके प्रति हमारी ग़लतफ़हमी दूर हुई... 
हमाम में सब नंगे हैं...

अब आम आदमी पार्टी के रणबांकुरे तय करें वो आखिर किस नैतिकता के साथ व्यवस्था परिवर्तन की इस मुहिम में बेमानों के साथ खड़े हो रहे हैं ? या पद और टिकट के लालच के कारण मौन रहना है ?

घोटाला करने वाले व पीड़ितों के नाम चंदा एकत्र कर कुंडली मारने वाले बेमानों के अन्दर तो इतना भी साहस नहीं है कि नैतिकता के आधार पर त्याग पत्र ही दे दें|

स्नेहपूर्ण जनहित अभिलाशी,
भार्गव चन्दोला (हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)
सामाजिक, आर.टी.आई. एवं राजनीतिक कार्यकर्त्ता
नोट: विस्तार से सबूत के साथ नीचे दिए लिंक पर देंखें:

शनिवार, 30 अगस्त 2014

जन्मदिन का उत्सव जीवन देने वाले कर्मों से ही सफल होगा

दोस्तों जन्म दिन की हार्दिक बधाई, आप अपने या अपने परिवार के सदस्यों का जन्मदिन अपने आस-पास के क्षेत्रों में कम से कम 5 और अधिकतम अपनी छमता अनुसार फलदार वृक्ष लगाकर मनाएं, इससे एक ओर जहाँ प्राकृतिक पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा वहीँ दूसरी तरफ आपके ऐसा करने से भूखे मनुष्यों एवं पशु-पक्षियों के लिए भोजन की प्राप्ति होगी, साथ ही आप अपने और अपने परिवार की इस प्रकृति के प्रति नैतिक जिम्मेदारी भी पूरी करेंगे| इतना ही नहीं एसा करने से आपके परिवार के सभी सदस्यों पर अच्छे संस्कार आयेंगे, एक दुसरे से स्नेह करेंगे व एक दुसरे के प्रति जिम्मेदारी महसूस करेंगे | जन्मदिन ऐसे मना करके तो देखिये आपकी व आपके परिवार की ख़ुशी कई गुना बढ़ेगी और आपको आत्मिक शान्ति का एहसास होगा | जब इसी प्रकार आप अपने परिवार के सदस्यों का जन्मदिन हर वर्ष मनायेंगे तो कुछ ही सालों में आप अपने आस-पास और अपने जीवन में एक बढ़ा बदलाव अपनी आँखों से देखेंगे|.............
स्नेहपूर्ण भार्गव चन्दोला (सामाजिक, आर.टी.आई. एवं राजनीतिक कार्यकर्त्ता), 
1, राजराजेश्वरी विहार, नथनपुर, देहरादून |