रविवार, 4 अक्टूबर 2015

माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड हरीश रावत जी के नाम खुला-पत्र

सेवा में,                                                                            दिनांक: 5-10-15 
       माननीय हरीश रावत जी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार

विषय: उत्तराखंड प्रदेश के शहरी, सरकारी एवं गांवों में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे निरंकुश अपराध, नशाखोरी, छेड़खानी, रैस-ड्राविंग, भ्रष्टाचार और चेन-स्नेचिंग पर आधुनिक संचार तकनीक का स्तमाल कर रोक लगाने के सम्बन्ध में |

माननीय महोदय,
       महोदय प्रदेश में अपराध, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न व अनियंत्रित ट्रैफिक जैसी समस्या लगातार बढ़ रही हैं जिस कारण आम जनता घर हो या बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं है| अत: महोदय आप से युद्ध स्तर पर निम्न मांग को जल्द से जल्द पूरा करने का आग्रह है:
·      उत्तराखंड में अपराध, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न, अनियंत्रित ट्रैफिक की समस्या चरम पर है, इस पर अंकुश लगाने के लिए राज्य की अंतर्राज्य एवं अंतराष्ट्रीय सीमा, राज्य के सभी थाना, चौकी, ग्रामसभा कार्यालय, छेत्र पंचायत कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय, पटवारी चौकी, डी.एम्. कार्यालय, सी.डी.ओ. कार्यालय, सचिवालय, विधानसभा, सभी सरकारी एवं निजी स्कूल/कालेज, सरकारी कार्यालयों एवं राज्य के सभी शहरों एवं ग्राम के वार्डों के चौक-चौराहों में स्पीड रडार के साथ सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाये जायें और सभी आने जाने वालों पर कंट्रोल रूम बनाकर नजर रखी जाए| किसी भी तरह की अवैध गतिविधि जैसे गलत दिशा में ड्राइव, तेज गति से गाड़ी चलाना, स्टंटबाजी, बिना हेलमेट ड्राइव, मानक से ज्यादा सवारी, छेड़खानी, मारपीट, चेन स्नेचिंग, चोरी, शोषण आदि का संदेह होने पर त्वरित जवाबदेही के साथ कार्यवाही की जाए, किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने से रोका जाए और गलत व्यक्ति का बिना भेद-भाव के चालान काट कर जुर्माना वसूल किया जाए |
·      महोदय सरकारी कर्मचारीयों से काम तब लिया जा सकता है जब वो अपने कार्यस्थल पर मौजूद रहें सड़क तब अच्छी बनेगी जब इंजिनियर साईट पर मौजूद हो, शिक्षक अच्छी शिक्षा तब देंगे जब वो क्लास में मौजूद हों, डाक्टर अच्छा ईलाज तब करेंगे जब वो अस्पताल में अपने कमरे में मौजूद हों मगर जब कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर ही मौजूद नहीं होते हैं तो कार्य कैसे होंगे ? महोदय इस समस्या के समाधान के लिए सभी सरकारी कर्मचारियों की प्रतिमाह प्रतिदिन की मोबाईल लोकेशन की सूचना जांच कर वेतन बिल में भरनी सुनिश्चित की जाए और जिस कर्मचारी की  मोबाईल लोकेशन कार्यस्थल पर मौजूद न मिले उसका वेतन काट दिया जाए तभी सरकारी कर्मचारी अपनी जिमेदारी पूर्ण करेंगे|
·      महोदय शुक्रवार हाफ, शनिवार साफ़, रविवार छुट्टी सोमवार माफ़ और जब कार्यलय में आये तो 11 बजे बैठकर 1 बजे लंच और उसके बाद छुट्टी जैसी सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली से आप भलीभांति वाकिफ़ हैं इस पर रोक के लिए सभी सरकारी विभागों/स्कूल/कालेज आदि में आने-जाने के समय को दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक हस्ताक्षर उपकरण लगाये जायें और बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही कर्मचारियों को वेतन दिया जाए |
·      कर्मचारी/अधिकारीयों के अलग से केबिन की प्रथा बंद कर बड़े-बड़े हाल बनाकर एक साथ हाल में कार्य करने के लिए व्यवस्था की जाए, जिससे शोषण, अपराध, रिश्वतखोरी व कामचोरी पर रोक लगे|

महोदय आशा है प्रदेश की सवा करोड़ की आम जनता की सुरक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन आपके लिए सर्वोपरि होगा और उपरोक्त विषय को पूरा करने में आप किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होने देंगे धन्यवाद |

भार्गव चन्दोला
1, राजराजेश्वरी विहार, लोवर नथनपुर, देहरादून-248001, संपर्क न. 9411155139, email: bhargavachandola@gmail.com

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

हा हा हा हा हा हा हा हा "गरीबी हटाओ"

अंग्रेजों से भारत देश के आजाद होने के बाद
कांग्रेस ने नारा दिया "गरीबी हटाओ" तो सभी कांग्रेस नेताओं की गरीबी हट गई,
सपा ने नारा दिया "गरीबी हटाओ" तो सभी सपा नेताओं की गरीबी हट गई,
बसपा ने नारा दिया "गरीबी हटाओ" तो सभी बसपा नेताओं की गरीबी हट गई,
आम आदमी पार्टी ने नारा दिया "गरीबी हटाओ" आजकल "आप" नेताओं की जम कर गरीबी हट रही है.
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जनता से वोट पाकर जब उसी जनता में से एक भोले इन्सान ने पूछा अरे भाई तुमने तो हमारी गरीबी हटाने का वादा किया था और तुम सब अपनी अपनी गरीबी हटाकर हमें भूल गए तो "कांग्रेस, सपा, बसपा, आप" के ठग नेता उस भोले इन्शान को देख कर ठहाके लगाने लगे...
हा हा हा हा हा हा हा हा "गरीबी हटाओ"
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इधर केंद्र में भाजपा सरकार ने नारा दिया "महंगाई हटाओ" अब भाजपा नेता महंगाई हटाते हुए देश के गरीबों की गरीबी हटाते हैं या अपनी ये देखने वाली बात है... ?
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#जय_हिन्द
#गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_उत्तराखंडी_हैं
@Bhargava Chandola - भार्गव चन्दोला​

सोमवार, 14 सितंबर 2015

आज हिंदी दिवस 14 सितम्बर है: क्या हम हिंदी भाषा के माध्यम से चिकित्सा, शिक्षा, तकनीकी और विज्ञान सभी क्षेत्रों में शोध से लेकर इन्वेंट तक सबकुछ हिंदी भाषा के माध्यम से कर सकते हैं ?

आज हिंदी दिवस है तमाम विश्वभर में फैले हिंदी प्रेमियों को हार्दिक बधाई, दोस्तों आखिर हम तब ही क्यों जागते हैं जब कोई वस्तु, भाषा या प्राणी मृत प्राय: होने लगते हैं? जब भारत वर्ष में बाग़ 100 दो सौ बच गए तब उन्हें बचाने के लिए "सेव टाइगर अभियान" शुरू किया गया, वही हाल पर्यावरण, गंगा, ग्लेशियर, बेटी, हाथी, बचपन, भ्रूर्ण आदि का भी है, आज हिंदी के साथ भी यही हो रहा है, ऐसे में मुझे एक फ़िल्मी डायलोग याद आ रहा है जिसमें शायद हीरो कहता है "जाओ पहले उसके हस्ताक्षर ले कर आओ जिसने मेरे माथे पर चोर लिखा" |
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हिंदी और हिन्दुस्तानियों को लेकर मुझे दो बातें समझ आ रही हैं कि आज विश्वभर में हिन्दुस्तानी जितना भी परचम लहरा रहे हैं और करोड़ों लोग आर्थिक रूप से मजबूत धनवान अप्रवासी भारतीय बने हुए हैं वो सब तो अंग्रेजियत की बदौलत ही है यानि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी भाषा में महारत हाशिल करने से ही उनके लिए ऐसा सम्भव हुवा है |
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दूसरी तरफ अगर आज हम हिंदी भाषा के माध्यम से चिकित्सा, शिक्षा, तकनीकी और विज्ञान सभी क्षेत्रों में शोध से लेकर इन्वेंट तक सबकुछ हिंदी भाषा के माध्यम से कर सकते हैं और आज हमें हिंदी भाषा को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलवानी है, तो हमें केवल ऊपरी स्तर पर नहीं बल्कि बुनियाद से लेकर ऊपरी स्तर तक हिंदी की अनिवार्यता को लागू करना होगा और ये तभी संभव है जब भारत के सभी निजी एवं सरकारी स्कूल, कालेज, चिकित्सा, तकनीकी, विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण एवं शोध संस्थान आदि सभी में अध्यन अंग्रेजी माध्यम के बजाये हिंदी माध्यम से करवाया जाए |
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इसमें ये भी देखने की आवश्यकता है कि जो बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से पढ़े हैं या पढ़ रहे हैं उनके उनके भविष्य पर इन बदलाओं का कोई विपरीत प्रभाव न पढ़े |
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‪#‎जय_हिन्द‬
‪#‎गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_उत्तराखंडी_हैं‬
@Bhargava Chandola - भार्गव चन्दोला

रविवार, 13 सितंबर 2015

आखिर लोकतंत्र जनता के लिए है या जनता के करों से वेतन/भत्ते लेने वाले कर्मचारियों के लिए ?

वैसे तो देश भर का यही हाल है मगर यदि केवल उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में सरकारी वेतन/भत्ते लेने वाले कर्मी वेतन-भत्ते और अन्य मांगों को लेकर आये दिन हड़ताल पर रहते हैं और सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों की सांठ-गांठ के कारण इनकी मांगे पूरी भी हो जाती हैं, मगर राजस्व घाटा से लेकर जानमाल तक खामियाजा आम जनता को भुगतना पढ़ता है, वक्त आ गया है कि इस विषय पर चर्चा हो आखिर लोकतंत्र जनता के लिए है या जनता के करों से वेतन/भत्ते लेने वाले कर्मचारियों के लिए ? वक्त आ गया है कर्मचारियों की जायज/नाजायज मांगों को लेकर होने वाली हड़तालों पर त्वरित रोक लगाई जाए और तमाम कर्मचारी संगठनों की मान्यता रद्द कर प्रदेश में केवल एक ही कर्मचारी संगठन को मान्यता दी जाए | कर्मचारी संगठन की किसी भी प्रकार की मांग को पूरा किया जाय या नहीं उसके लिए जनता से हर पांच साल में एक बार मतदान करवाया जाए और 80% मत यदि मांग पूरी करने के पक्ष में पढ़ते है तभी मांग पूरी की जाए वर्ना ख़ारिज की जाए | तभी प्रदेश और प्रदेश की जनता का विकास हो सकता है और यही विकल्प अन्य राज्यों और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी अपनाया जाए |
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वर्ना यही देखने को मिलता रहेगा नर्सें हड़ताल पर, शिक्षक हड़ताल पर, डाक्टर हड़ताल पर, पटवारी हड़ताल पर, ग्राम विकास अधिकारी हड़ताल पर, आशा कार्यकर्ती हड़ताल पर, भोजनमाता हड़ताल पर, शिक्षा मित्र हड़ताल पर, नरेगा कर्मी हड़ताल पर, राजस्व अमीन हड़ताल पर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती हड़ताल पर, सचिवालय कर्मी हड़ताल पर,  जल-संस्थान कर्मी हड़ताल पर, बिजली कर्मी हड़ताल पर, सफ़ाई कर्मी हड़ताल पर, फार्मेसिष्ट हड़ताल पर, बैंक कर्मी हड़ताल पर, जंगलात कर्मी हड़ताल पर, उपनल कर्मी हड़ताल पर, युवा कल्याण कर्मी हड़ताल पर ऐसा कोई कर्मचारी संगठन है जो पिछले 15 सालों में हड़ताल पर न गया हो ? जिसने स्व:हित के लिए नहीं प्रदेश की जनता और प्रदेश हित के लिए हड़ताल की हो ?
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#जय_हिन्द
#गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_उत्तराखंडी_हैं
Bhargava Chandola - भार्गव चन्दोला​

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

उत्तराखंड में "ट्रांसफर एक्ट" लागू न होने के दो अति-मुख्य कारण

प्यारे साथियों अगर सच में उत्तराखंड से प्यार है तो
एक लाइक
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कमेन्ट और शेयर अवश्य करें और
माननीय मुख्यमंत्री हरीश रावत जी का ध्यान इस विषय पर ले जाने और
ट्रांसफर एक्टलागू करवाने का संकल्प तक इस पोस्ट को अपनी वाल पर शेयर करें अपने दोस्तों को टैग करें...  
उत्तराखंड में "ट्रांसफर एक्ट" लागू न होने के दो मुख्य कारण
 

1. अरबों रूपये की दलाली करने वाले नेतागण
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पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्त्ता, अधिकारी और बाबू जो किसी प्रकार का श्रम न करने के बावजूद धनवान हो रहे हैं और विलासिता का जीवन जी रहे हैं... अगर ट्रांसफर एक्ट लागू हो गया तो सवा करोड़ की जनता को समय पर शिक्षा, चिकित्सा, स्वरोजगार, बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता आदि मिलेगी और बेमान नक्कारे लोगों को मेहनत करके खाना होगा |
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2. अगर
ट्रांसफर एक्टलागू हो गया तो सालों से सुगम अति-सुगम स्थानों में बैठे मंत्री/विधायक/नेता/अधिकारी/बाबु/सामाजिक कार्यकर्त्ता/पत्रकार आदि की बेटी, बेटा, पत्नी, पति, दामाद, भांजा, भतीजा, घरवाली, बाहरवाली, जीजा, साली आदि सभी को अनिवार्य रूप से ट्रांसफर होकर दुर्गम स्थानों में सेवा देनी होगी और सालों से दुर्गम परिस्थिति में कार्य करने वालों को न्याय मिलेगा और जनता को गुणवत्तायुक्त सेवाएं |
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मित्रों सवा करोड़ की जनता आज चंद लोगों की करनी का फल भुगत रही है... कहो हरदा से भ्रष्टचारियों के सिर पर नहीं जनता के सिर पर हाथ रखने से बनेंगे असली धरती पुत्र इसलिए शीघ्र
ट्रांसफर एक्टलागू करें...
#जय_हिन्द
 
#गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_उत्तराखंडी_हैं 
@Bhargava Chandola

हड़ताली प्रदेश उत्तराखंड: कर्मचारियों के लिए नहीं जनता के लिए है लोकतंत्र

कर्मचारियों के लिए नहीं जनता के लिए है लोकतंत्र उत्तराखंड के सवा दो लाख कर्मचारियों के कारण पूरे प्रदेश की सवा करोड़ जनता त्रस्त है, जनता के द्वारा चुन कर भेजे गए सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि भी जनता की नहीं इन कर्मचारियों की ही भाषा बोलते है... समय आ गया है उच्च न्यायालय उत्तराखंड के तमाम सरकारी खजाने से वेतन/भत्ते लेने वालों पर अगले 15 साल किसी भी प्रकार का धरना-प्रदर्शन, हड़ताल आदि पर पूर्णत: रोक लगाये और जो उलंघन करे उसे त्वरित बर्खास्त किया जाये... तभी इस प्रदेश का विकास हो सकता है और जनता को लाभ...

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

आज 9 सितम्बर यानि "हिमालय दिवस" है आपको बधाई भी कैसे दूँ..?

हमें जीवन को सुरक्षित रखना है तो हमें हिमालय को सुरक्षित रखना होगा
दोस्तों हिमालय बचाने और हिमालय बसाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे, एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है वहीँ हिमालयी राज्यों में तैनात भ्रष्ट सरकारों के भ्रष्ट नेता, भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट बाबू, भ्रष्ट इंजिनियर, भ्रष्ट ठेकेदार, भू-माफ़िया, खनन माफ़िया, बन-माफ़िया, भ्रष्ट प्रधान, भ्रष्ट ग्राम विकास अधिकारी, भ्रष्ट फोरेस्ट्र अधिकारी और भ्रष्ट सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी हिमालय को कम ख़तरा नहीं है, ये वो लोग हैं जिनके कारण हिमालयी क्षेत्र की परिधि में विस्फोटकों के इस्तमाल से अनियोजित और घटिया निर्माण कार्य होते हैं, जिस कारण बार-बार निर्माण सामग्री की आवश्यकता होती है और बार बार खनन होता है, वृक्षों का रोपण जमीन पर कम कागजों में ज्यादा होता है जिसे हर वर्ष दावाग्नि की आग में दफ़न कर दिया जाता है, योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों की जगह ग्राम-प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की भ्रष्ट जोड़ी अपनी तिजोरियां भरने में लेती है जिस कारण ग्रामवासी पलायन को मजबूर होते हैं, दोस्तों हिमालय को तंदुरुस्त रखने के लिए इन लोगों को सुधरना होगा और अपने कार्यों में निष्ठा और पारदर्शिता लानी होगी, तभी हिमालय दिवस का दिन हमारे लिए सुखमय और आनंदमई होगा|
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‪#‎जय_हिन्द‬
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Bhargava Chandola

गुरुवार, 20 अगस्त 2015

मुख्यमंत्री हरीश रावत जी का पोता स्कूल न भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है?

मुख्यमंत्री हरीश रावत जी का पोता स्कूल न भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है? नेताशाही की कुर्सी तो विरासत में मिल ही जायेगी... सवाल ये उठता है कि 
क्या उत्तराखंड सरकार भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फ़ैसले का सम्मान करेगी या उत्तराखंड सरकार के लिए उच्च न्यायालय को अलग से आदेश देना होगा ? 
इलाहबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी सरकारी कोष (जनता के करों से एकत्रित) से वेतन भत्ते लेने वाले नेताशाही,अफ़सरशाही,जजशाही,बाबूशाही आदि को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा और इसका पालन 6 माह के अन्दर करके इलाहाबाद उच्च-न्यायालय को रिपोर्ट देनी होगी....
‪#‎जय_हिन्द‬
‪#‎भार्गव_चन्दोला‬
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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

"पृथ्वी दिवस: हमें जो आवश्यक नहीं भी था वो भी हमने धरती का सीना छलनी करके हासिल किया"

आज 45वां पृथ्वी दिवस यानि 22 अप्रैल का दिन है, विश्व के 192 देश पृथ्वी के प्रति आज अपना चिंतन ब्यक्त करेंगे... जीवन दायनी पृथ्वी पर हो रहे उथल पुथल के लिए हमें तय करना होगा  हम जिस प्रकार का जीवनयापन कर रहे हैं, क्या उससे आने वाली पीढियां हमें माफ़ कर पायेंगी?
विश्व की जनसँख्या आज 7 अरब के पार पहुँच चुकी है, अकेले भारत पर गौर करें तो 68 वर्ष पूर्व जब भारत आजाद हुवा था तब भारत की जनसँख्या मात्र 30 करोड़ थी जो आज बढ़ कर 130 करोड़ हो चुकी है और ये सरकारी आंकड़ा है जिस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह रहता है, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल आदि देशों के भी करोड़ों लोग अवैध रूप से भारत में रहते हैं| संसाधनों की बात करें तो भारत में आज़ादी के समय से ही भुखमरी चल रही थी जबकि तब जनसँख्या मात्र 30 करोड़ थी, ऐसे में आज ये और भी सोचनीय विषय हो जाता है कि आज भारत की 130 करोड़ की जनसँख्या के लिए खाद्यान कहाँ पैदा होता होगा? कहाँ इतनी जनसँख्या रहती होगी ? क्या खाती होगी ? कहाँ चलती होगी ? और कैसे चलती होगी ? क्या हमने कभी इस ओर गौर किया ?
आज विश्व भर में 7 अरब से उपर की जनसँख्या हो चुकी है, ऐसे में गौर करने वाली बात ये है कि केवल जनसँख्या ही नहीं बढ़ी बल्कि मनुष्य की भौतिक आवश्यकताएं भी साथ-साथ बढीं हैं ? भवन, गाड़िया, सड़क, कारखाने, होटल, मॉल, दुकान, रेल, जहाज, मोबाइल, टीवी, फ्रिज, एसी, कूलर, पंखे, बल्ब, प्लास्टिक, लोहा, कांच, कोयला, तेल, गैस, चूल्हा, चिमनी, कम्प्यूटर, फैक्स, फोटो स्टेट मशीन, बिजली परियोजनायें, मोटर, बैट्री, टाइल, ईंट, सीमेंट, पेंट, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च, आश्रम खिलोने आदि ? ये सब बढ़ा है और बेतहाशा बढ़ा है और ये सब हमें किसने दिया ? हम इंसानों ने अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिस भी वस्तु की आवश्यकता हुई वो हमने पृथ्वी से हासिल की, इतना ही नहीं हमें जो आवश्यक नहीं भी था वो भी हमने धरती का सीना छलनी करके हासिल किया ?
हम हिन्दू,मुसलमान,सिख,इसाई,बौध,पारसी,यहूदी चाहे किसी भी समुदाय से हों, चाहे कितने ही पूंजीपति या गरीब हों हम सबका अस्तित्व तभी तक है जब तक ये धरती और इसका पर्यावरण सुरक्षित है, यहाँ शुद्ध पीने का पानी, खाने के लिए पोष्टिक खाद्यान  और साँस लेने के लिए शुद्ध हवा है |
धरती को सुरक्षित रखने की नैतिक जिम्मेदारी हम मानवों पर है और हम मानव ही इसको नष्ट करने पर तुले हैं| हमें धरती के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा | हमें धरती पर कम से कम कंक्रीट, जीव-जंतुओं,पशु-पक्षियों की सुरक्षा, शुद्ध पानी के लिए वृक्षारोपण, कूड़े का जैविक निस्तारण, जैविक खेती, सौर एवं पवन उर्जा का स्त्माल, ग्रीन-हाउस गैसों में कमी लाने के लिए ठोस और कारगर कदम उठाने होंगे, तभी जाकर हम धरती को सुरक्षित रख पायेंगे |

भार्गव चन्दोला (सामाजिक कार्यकर्ता, हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)
1, राजराजेश्वरी विहार, लोवर नथनपुर,
पोस्ट आफिस नेहरुग्राम, देहरादून-248 001

सम्पर्क न. 09411155139, Email: bhargavachandola@gmail.com

शनिवार, 3 जनवरी 2015

नव वर्ष 2015 की हार्दिक बधाई “प्यारे देशवासियों दूषित पर्यावरण से धरती व् जीवन पर खतरा मंडरा रहा है”

आओ नववर्ष पर पर्यावरण को सुरक्षित रखने हेतु कुछ संकल्प लें:-
  1. पालिथीन का इस्तमाल कम से कम करेंगे व् इस्तमाल की गई पालिथीन को एकत्र कर वापस दुकानदार को सौंपेंगे|
  2. अपने पालतु जानवरों को आवारा नहीं छोड़ेंगे व् अपने पालतु जानवरों को घर में ही सौच करवाएंगे |
  3. खाना बनाने के बाद बचा हुवा खाना व् फल शब्जी के छिल्के आदि अपने आसपास बनी दूध की डेरी के गाय/बछड़ों को खिलाकर उनकी सेवा करेंगे |
  4. अपने घर, गली, गाँव, शहर में न गंदगी करेंगे न किसी को करने देंगे |
  5. अपने व् अपने प्रियजनों के जन्मदिवस, शादी, शादी की शालगिरह आदि पर हर वर्ष कम से कम 5 फलदार वृक्ष लगायेंगे |
  6. धरती पर अनावश्यक कंक्रीट के जंगल नहीं उगने देंगे |
  7. बेटी-बहुओं को अच्छी शिक्षा व् सम्मान देंगे |
  8. यातायात नियमों का पालन करेंगे, हमेशा हैलमेट पहनकर, शीट बैल्ट बांधकर, धीमी गति से अपनी दिशा में वाहन चलायेंगे |
  9. नदी-नौलों में किसी भी प्रकार की पूजा सामग्री नहीं डालगें और नदी-नौलों को स्वच्छ रखेंगे |
  10. भ्रष्टाचार मुक्त विश्व के लिए न कभी रिश्वत लेंगे और न रिश्वत देंगे |
भार्गव चन्दोला (सामाजिक कार्यकर्त्ता)
1, राजराजेश्वरी विहार, वार्ड न. 14, लोअर नथनपुर, देहरादून-248005,
संपर्क: 9411155139
WITH THE HELP OF ONE SHARE, HUNDRED PEOPLE ARE AWARE

 

बुधवार, 3 दिसंबर 2014

महाराणा प्रताप के नाम पर कालिख पोत रहा स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर, देहरादून

सेवा में,                                               दिनांक:  3-12-14
     श्रीमान लोकायुक्त महोदय/
     एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री हरीश रावत जी
     उत्तराखंड सरकार |

विषय: महाराणा प्रताप के नाम पर कालिख पोत रहा स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर देहरादून| नियमों को तार-तार कर शिक्षा विभाग की प्राइमरी सहायक शिक्षिका श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में प्रवक्ता के पद पर किया गया समायोजन| खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, खेल सचिव एवं अध्यक्ष स्पोर्ट्स कालेज मैनेजमेंट बोर्ड डा. अजय प्रद्योत, उपनिदेशक खेल श्री अजय कुमार अग्रवाल, स्पोर्ट्स कालेज प्राचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी पद्मेंद्र सकलानी द्वारा खेला गया श्रीमती मीना सिंह को समायोजन करने का खेल| खेल एवं युवा कल्याण विभाग में तैनात उपनिदेशक श्री शक्ति सिंह की पत्नी हैं श्रीमती मीना सिंह |
महोदय,
     तकनीकी क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन करता रुड़की आई.आई.टी., सैन्य क्षेत्र में आई.एम्.ए., कृषि क्षेत्र में पंतनगर विश्वविध्यालय की तरफ जब नजर जाती है तो फक्र से सीना चौड़ा हो जाता है की ये तीनों उत्तराखंड के अंग हैं| ठीक इसी प्रकार खेल जगत में प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की स्थापना की गई थी और कालेज प्रबंधन को प्रदेश से उत्तम छात्रों का चयन कर प्रशिक्षित करने का जिम्मा दिया गया था ताकि प्रदेश के नौनिहाल राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर खेल जगत में प्रदेश का नाम रोशन कर सकें मगर स्पोर्ट्स कालेज प्रबंधन कालेज की स्थापना के उद्देश्य को पूरा करने में पूर्ण रूप से विफल रहा है, कारण जानने के लिए मैंने सूचना का अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 के अंतर्गत स्पोर्ट्स कालेज से कुछ बिन्दुओं पर सूचना मांगी तो आनाकानी के बाद जो सूचना प्राप्त हुई उससे चौंकाने वाले तथ्य सामने आये जिन्हें देखकर हैरानी होती है, स्थापना से लेकर अब तक महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के साथ कालेज प्रबंधन, खेल विभाग, खेल मंत्री, खेल सचिव एवं उपनिदेशक खेल केवल अपने हितों को साधने का खेल खेलते नजर आ रहे हैं|
     ताजा मामला अभी-अभी शिक्षा विभाग में प्राइमरी स्कूल में प्राइमरी सहायक अध्यापिका श्रीमती मीना सिंह को सारे नियम कानूनों को दरकिनार करके महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज रायपुर, देहरादून में प्रवक्ता के पद पर समायोजन करने का है|
     श्रीमती मीना सिंह जिनकी नियुक्ति से लेकर अब तक की सारी सेवा देहरादून और आस-पास के सुगम क्षेत्र में रही है, शिक्षक स्थानान्तरण नीति बनने के बाद श्रीमती मीना सिंह को दुर्गम स्थान पर स्थानान्तरण पर जाना था मगर उससे पहले ही श्रीमती मीना सिंह के पति श्री शक्ति सिंह, उपनिदेशक खेल एवं युवा कल्याण ने जिला शिक्षा अधिकारी देहरादून श्री पद्मेंद्र सकलानी से 6 दिसंबर 2013 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवा दिया और अपने विभागीय अधिकारीयों एवं अपने पद का दुरुपयोग करके सारे नियमों को ताक पर रखकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नथनपुर, देहरादून में प्राइमरी सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात अपनी पत्नी श्रीमती मीना सिंह को सीधे महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में बिना किसी रिक्ति के आवेदन की विज्ञप्ति के सीधे सहायक अध्यापिका माध्यमिक के पद पर 10 दिसंबर, 2013 की बोर्ड बैठक में प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव पारित करवा दिया और अध्यक्ष मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी एवं सचिव, युवा कल्याण एवं खेलकूद, उत्तराखंड शासन के पद पर बैठे खुद प्रतिनियुक्ति पर आये डा. अजय प्रद्योत ने 14 दिसंबर शनिवार के दिन श्रीमती मीना सिंह को सीधे पांच वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति आदेश जारी कर दिया, कब यह आदेश जारी हुवा और कब श्रीमती मीना सिंह तक पहुंचा अगले दिन रविवार यानि 15 दिसंबर का अवकाश होने के बावजूद 16 दिसंबर, 2013 को मीना सिंह ने स्पोर्ट्स कालेज में प्रतिनियुक्ति पर अपनी जोइनिंग देकर उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी कर दिए इस सबसे सारा खेल समझा जा सकता है, वैसे तो सरकारी डाकें महीनों महीने नहीं आती हैं ये पहली बार हुवा होगा कि मीना सिंह के लिए डाकखाने रविवार को भी खुले रहे होंगे?
     श्रीमती मीना सिंह ने स्पोर्ट्स कालेज में प्रतिनियुक्ति पर अपनी 10 दिन की सेवा दी और उसके बाद स्पोर्ट्स कालेज से 1 जनवरी 2014 से 20 मई, 2014 तक के लिए बी.एड.शैक्षिक अवकाश ले लिया और इसे स्पोर्ट्स कालेज ने स्वीकृत भी कर दिया और स्पोर्ट्स कालेज श्रीमती मीना सिंह को सरकारी खजाने से प्रतिनियुक्ति भत्ते के साथ शैक्षिक अवकाश का वेतन भी जारी करता रहा अगर इसी प्रकार प्रदेश के सभी कर्मचारी वेतन के साथ शैक्षिक अवकाश पर जाते रहे तो प्रदेश की जनता का खजाना तो बिना बात के ही लुटता रहेगा| जबकि स्पोर्ट्स कालेज नियमावली, वर्ष 2013 में सहायक शिक्षा अध्यापक के पद पर प्राइमरी सहायक शिक्षा अध्यापक को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकता हो ऐसा कोई उल्लेख ही नहीं है|
     इधर श्रीमती मीना सिंह के शैक्षिक अवकाश पर गए एक माह भी पूरा नहीं हुवा उधर खेल मंत्रालय ने भी खेल एवं युवा कल्याण उपनिदेशक श्री शक्ति सिंह की पत्नी श्रीमती मीना सिंह के लिए और उदारता दिखाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री दिनेश अग्रवाल ने श्रीमती मीना सिंह को स्पोर्ट्स कालेज में समायोजन के लिए सचिव खेल/अध्यक्ष, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स सोसाइटी रायपुर, देहरादून को पत्रावली प्रस्तुत करने का लिखित आदेश जारी कर दिया उपनिदेशक, युवा कल्याण की पत्नी का सवाल जो था खेल मंत्री कैसे नहीं दरियादिली दिखाते?
     इधर श्रीमती मीना सिंह का शैक्षिक अवकाश पूरा होता उससे पहले ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के प्रधानाचार्य श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी श्रीमती मीना सिंह के लिए उदारता दिखाई और उनके शैक्षिक अवकाश के दौरान ही निदेशक खेल को श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में आमेलन के लिए पत्र लिख कर अनापत्ति जाहिर कर दी और मीना सिंह को बिना परीक्षा पास किये सफल घोषित कर दिया |
     श्रीमती मीना सिंह ने 20-9-14 को प्रधानाचार्य, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज को अपने बी.एड. कोर्स का अंकपत्र की छायाप्रति सेवा पुस्तिका में अंकित करने के लिए पत्र लिखा|
     श्रीमती मीना सिंह ने 22-9-14 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी को अपना समायोजन प्रवक्ता (इतिहास) के पद पर करने के लिए पत्र लिखा|
     30-9-14 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत ने सचिव, खेल उत्तराखंड शासन यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत को श्रीमती मीना सिंह, प्राइमरी सहायक अध्यापिका, शिक्षा विभाग के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में सेवा स्थानान्तरण के आधार पर आमेलन किये जाने के सम्बन्ध में पत्र जारी किया जिसके जवाब में सचिव, खेल उत्तराखंड शासन यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत खुद ही खुद को श्रीमती मीना सिंह का स्पोर्ट्स कालेज में प्रवक्ता के पद पर समायोजन करने की स्वीकृति प्रदान करते हैं |
     उपनिदेशक, युवा कल्याण एवं खेलकूद श्री शक्ति सिंह की पत्नी श्रीमती मीना सिंह को प्रवक्ता (इतिहास) के पद पर समायोजन करने का 9 अक्टूबर, 2014 को अध्यक्ष, मैनेजमेंट बोर्ड, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी रायपुर, देहरादून यानि डा. अजय कुमार प्रद्योत द्वारा आदेश जारी किया गया है, जबकि स्पोर्ट्स कालेज सेवा नियमावली वर्ष 2013 के भाग तीन पृष्ठ संख्या 4 में स्पष्ट उल्लेखित है कि प्रवक्ता के स्वीकृत पदों में 50% सीधी भर्ती द्वारा एवं 50% पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा जिसमें प्रवक्ता के पद पर पदोन्नति के लिए सहायक शिक्षा अध्यापक के पद में मौलिक रूप से नियुक्त शिक्षकों, जिन्होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को इस रूप में न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो और जो नियम 8(3) के अधीन पद के लिए विहित अपेक्षित अहर्ता रखता हो, में से पदोन्नति द्वारा भरा जाएगा, यहाँ ये भी स्पष्ट किया जाता है कि महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में वर्तमान में इतिहास विषय पढ़ाया ही नहीं जा रहा है और माध्यमिक शिक्षा परिषद (उत्तराखंड बोर्ड) से इतिहास विषय को पढ़ाया जाने की कोई मान्यता भी नहीं ली गयी है जो कि प्रवक्ता (इतिहास) पर श्रीमती मीना सिंह की नियुक्ति को और भी संदिग्ध बनाता है|
     जबकि श्रीमती मीना सिंह द्वारा सहायक अध्यापक के पद पर स्पोर्ट्स कालेज में मात्र 10 दिन ही सेवा दी गई है, इससे पूर्व में मीना सिंह प्राइमरी सहायक अध्यापिका रही हैं न की माध्यमिक सहायक अध्यापिका इससे स्पष्ट है कि मीना सिंह की नियुक्ति के लिए किस प्रकार से खेल खेला गया है| जिस प्रकार एक प्राइमरी सहायक शिक्षिका को प्राइमरी सहायिका से प्रवक्ता के पद तक का खेल रचा गया वो प्रदेश के उन प्रतिभावान युवाओं के अधिकारों पर कुठाराघात है जो दिन रात इस आशा के साथ लगन मेहनत करते हैं कि एक दिन उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलेगा|
            इसके आलावा श्रीमती मीना सिंह जहाँ जहाँ पर भी तैनात रही हैं उनके पति श्री शक्ति सिंह, उपनिदेशक, खेल एवं युवा कल्याण द्वारा विभागीय गाड़ी को विभागीय कार्यों के बजाय अपनी पत्नी श्रीमती मीना सिंह को लाने ले जाने के कार्य में दुरूपयोग किया जाता रहा है जिसका शाक्षी जिस क्षेत्र में श्रीमती मीना सिंह तैनात रही हैं वहां की जनता और मैं स्वयं हूँ, महोदय ऐसे कृत्य से प्रदेश की जनता के राजस्व पर डाका डाला गया है |
     महोदय अगर इसी प्रकार प्रदेश में जंगलराज कायम रहेगा और कर्मचारी अधिकारी अपने परिवार के सदस्यों के लिए सारे नियम कानूनों को धत्ता बताते रहेंगे तो प्रदेश के बेरोजगार कहाँ जायेंगे ? महोदय इस प्रकार के कृत्यों से प्रतिभावान युवाओं का मनोबल टूटता है और वो अवसादग्रस्त होकर अपराध जगत की ओर जाने को मजबूर होते हैं इसलिए ऐसे विषयों पर दोषियों पर कढ़ी से कढ़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए|
     अत: महोदय आप से आग्रह है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग एवं महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की स्थापना से लेकर अब तक हुई नियुक्ति, तमाम खरीद फ़रोख्त, सांस्कृतिक आयोजन, खेल आयोजन, स्किल डेवलपमेंट, पायका के तहत बनाये गए खेल मैदान, एवं निर्माण कार्यों की सी.बी.आई. जांच करवाई जाए एवं जो भी दोषी हों जितने भी शक्तिशाली हों उन सभी पर कढ़ी से कढ़ी कार्यवाही की जाए, साथ ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज को उसके नाम के अनुरूप आई.आई.टी. रुड़की, आई.एम्.ए. एवं पंतनगर विश्वविद्यालय की तरह प्रतिष्ठित बनाया जाए ताकि खेल जगत में प्रदेश के नौनिहाल उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें|

धन्यवाद,

भार्गव चन्दोला (सामाजिक कार्यकर्त्ता)
पूर्व प्रदेश सचिव आप उत्तराखंड
1 राजराजेश्वरी विहार, वार्ड न. 14, नथनपुर, पो.ओ.नेह्रुग्राम-248005, 
देहरादून, उत्तराखंड

संपर्क न. 09411155139, email: bhargavachandola@gmail.com